School Children Protest: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में आजादी के जश्न के बीच एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ग्राम पंचायत चंदूपुर के स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क की मांग को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में तिरंगा थामे सैकड़ों बच्चे करीब 5 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सड़क को तरस गया गांव चंदूपुर गांव की सड़क लंबे समय से जर्जर और कच्ची बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक गांव को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार शिकायतें और प्रदर्शन होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिसके बाद इस बार बच्चों ने खुद आंदोलन की कमान संभाल ली। तिरंगे संग प्रदर्शन 'हर घर तिरंगा' अभियान के माहौल के बीच बच्चों ने अपने आंदोलन को देशभक्ति का स्वरूप दिया। तिरंगा हाथ में लेकर निकाली गई यात्रा गांव से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंची। रास्ते भर बच्चे सड़क निर्माण की मांग करते रहे। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद छात्र-छात्राएं और ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने का स्पष्ट भरोसा मिलने के बाद ही वे प्रदर्शन समाप्त करेंगे। प्रशासन का आश्वासन प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमा सक्रिय हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। एसडीएम और क्षेत्राधिकारी सदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने ग्रामीणों और बच्चों की समस्याएं सुनीं तथा उन्हें समाधान का भरोसा दिलाया। अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि चंदूपुर मार्ग के निर्माण में वन विभाग की अनुमति एक बड़ी बाधा थी, जो अब मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि करीब 1.81 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया में अब अनावश्यक देरी नहीं होगी। सड़क पर उम्मीदें ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल चंदूपुर गांव के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों और मजरों के लोगों के लिए भी जीवनरेखा है। जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद यह मार्ग वर्षों से बदहाल पड़ा है। सड़क खराब होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की आवाजाही पर लगातार असर पड़ रहा है। बच्चों के इस शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली आंदोलन ने प्रशासन का ध्यान एक बार फिर गांव की बुनियादी समस्या की ओर खींचा है। अब ग्रामीणों और छात्रों की निगाहें प्रशासन के उस वादे पर टिकी हैं, जिसमें जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने का भरोसा दिया गया है। ये भी पढ़ें: महिला सिपाही संग रह रहे सिपाही पति को पत्नी ने रंगे हाथ पकड़ा, आपत्तिजनक हालत देखकर मचा बवाल